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5 साल की गीता ने दिया तीन शावकों को जन्म भिवानी तो वातावरण भा रहा है शेरों को

5 साल की गीता ने दिया तीन शावकों को जन्म भिवानी तो वातावरण भा रहा है शेरों को

Satyakhabarindia

भिवानी के चिड़ियाघर में शेरों का कुनबा बढ़ने लगा है। रात 9:14 पर शेरनी गीता ने तीन शावकों को जन्म दिया है। तीनों के पिता चिड़ियाघर में ही रहने वाले सिंबा हैं। इससे पहले दो अक्तूबर 2023 को भी इसी चिड़ियाघर में गीता ने दो शावकों को जन्म दिया था। वे दोनों भी अब स्वस्थ हैं।

शहरी भागदौड़ और कंक्रीट के बसेरों में एक बार फिर प्रकृति की मुस्कान दहाड़ संग लौटी है। वीरवार की रात को जब सब सो रहे थे, तभी स्थानीय चिड़ियाघर के एक कोने में जीवन की नई धड़कनों की दहाड़ गूंजी। शेरनी गीता ने अपने बाड़े में तीन नन्हें शावकों को जन्म दिया। तीन नई सांसें, तीन नए गर्जन, जो आने वाले समय में इस धरती की ताकत बनेंगे। यह खबर सिर्फ भिवानी के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए उम्मीद की तरह आई है। ऐसे दौर में जब जंगलों में शेरों की दहाड़ कम होती जा रही है, गीता का फिर से मां बनना प्रकृति की पुनर्जीवित होती शक्ति की निशानी है। गीता इससे पहले भी दो साल पहले शेरा और सिंघम नाम के दो शावकों को जन्म दे चुकी है। अब ये दोनों व्यस्क हो चुके हैं। शेरों की नई पीढ़ी आगे बढ़ रही है।

कठिन सफर के बाद खुशखबरी

गीता की कहानी संघर्षों से भी जुड़ी है। 2014 में बाघ ब्रांडिस की मौत के बाद भिवानी चिड़ियाघर छह वर्षों तक शेर या बाघ से खाली रहा। फिर लाकडाउन के बीच उम्मीदें लेकर आए वे तीन शावक और अब वही गीता, जो तब महज एक बच्ची थी, पांच साल में मां की पहचान पा चुकी है। बीते दिनों गीता पर इंदौर से लाए गए शेर शिवा ने हमला भी किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उस दर्द और डर से उभरकर, आज वही गीता नए जीवन की वाहक बनी है। यह जीत सिर्फ एक शेरनी की नहीं, बल्कि प्रकृति की जिजीविषा की मिसाल है।

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भिवानी शेरों का घर

भिवानी का वातावरण इन शेरों को खूब भा रहा है। दिसंबर 2020 में जब रोहतक से तीन शावक, गीता, सुधा और अर्जुन यहां लाए गए थे, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही वर्षों में यह जगह शेरों का सुरक्षित अभ्यारण्य बन जाएगी। बाद में इंदौर से आया सिंबा, गीता का साथी बना। दोनों की जोड़ी ने इस बाड़े को जीवंत कर दिया। अब जब तीन नए शावक जन्मे हैं, तो यह न सिर्फ एक जैविक सफलता है, बल्कि एक संवेदनात्मक कहानी भी, भरोसे, देखभाल और प्राकृतिक सामंजस्य की।

शेरनी व शावक अव चिकित्सकीय देखरेख में

चिड़ियाघर प्रशासन ने गीता और उसके शावकों को फिलहाल विशेष निगरानी में रखा है। शावक कुछ महीनों तक मां के साथ अलग पिंजरे में रहेंगे ताकि वे सुरक्षित रहें और धीरे-धीरे दुनिया से परिचित हो सकें। वन्य प्राणी विभाग के इस्पेक्टर देवेंद्र हुड्‌डा बताते हैं, ‘शेरनी गीता और उसके तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्हें चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है। चार-पांच महीने बाद लोग इन्हें बाड़े में खेलते देख सकेंगे।

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15-20 दिन में खोलेंगे आंखें

जू के वन निरीक्षक देवेंदर हुड्डा ने बताया कि तीनों शावक 15 से 20 दिन में आंखें खोलेंगे और इधर-उधर घूमना शुरू करेंगे। उनके नर व मादा होने का भी तभी पता चलेगा जब वे खुद बाहर निकलना शुरू करेंगे। अभी शावकों की सुरक्षा को लेकर शेरनी हिंसक हो जाती है। शावकों व उनकी मां की गतिविधियों पर नजर रखने व उनके खान-पान का इंतजाम देखने के लिए सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जा रही है।

एक महीने बाद नामकरण

एक महीने बाद पर्यावरण एवं वन मंत्री राव नरबीर सिंह शावकों का नामकरण करेंगे। 2023 में जन्मे शावकों के नाम कर्मचारियों ने शेरा व सिंघम रखे थे। इन दोनों का जन्मदिन इसी साल दो अक्तूबर को मनाया गया था। पहली बार चिड़ियाघर के अधिकारियों ने दोनों को बड़े बाड़े में भी रखा ताकि आमजन इन्हें देख सके। पहली बार बाड़े में आने के बाद दोनों उछल-कूद करते नजर आए थे। उनके लिए चिड़ियाघर में एक सप्ताह तक दर्शकों की एंट्री भी निशुल्क कर दी गई थी।

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जाल के पास जाने पर प्रतिबंध

चिड़ियाघर के स्टाफ ने जाल के अंदर शावकों के जन्म से पहले ही नई मिट्टी डालकर मखमली फर्श तैयार किया और भोजन-पानी की पूरी व्यवस्था कर दी थी। शावकों की सुरक्षा को लेकर शेरनी हिंसक न हो इसके लिए जाल के आसपास किसी भी व्यक्ति के जाने पर रोक लगा दी। देर रात जू के अंदर जिला वन्य अधिकारी चरणजीत सिंह के निर्देशों पर निरीक्षक देवेंदर हुड्डा व वन्य जीव रक्षक सोमवीर ने शावकों का जन्मोत्सव मनाया।

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